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Author Topic: मंगल ग्रह - कुछ खास  (Read 1133 times)

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मंगल ग्रह - कुछ खास
« on: December 17, 2014, 04:07:05 PM »
मंगल ग्रह - कुछ खास
प्रत्येक ग्रह कोई न कोई विशेष स्थिति बनाता है जिनमें से मंगल भी एक है। यदि मैं गलत नहीं हूं तो ज्योतिष में सबसे ज्यादा चर्चा मांगलिक की चलती है। दुष्प्रभावी है लेकिन मांगलिक होना एक ऐसा योग है जो ज्योतिष के परम विरोधी को भी ज्योतिष पर विश्वास करने को मजबूर कर देता है। आज हम मंगल की इन्हीं स्थितियों पर विशेष एवम् गहन चर्चा करेंगे। कुंडली में विशेष तौर पर सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल का होना विशेष हानि करता है, शेष स्थानों पर मंगल मेरे अनुभवानुसार खास नुकसान नहीं करता। सप्तम भाव में स्थित मंगल पति पत्नि में तारतम्य का अभाव रखता है, यह मंगल दोनों में से किसी की विशेष हानि नहीं करता लेकिन इन लोगों का झगङा भी कभी खत्म नहीं होता। विचारों में तालमेल कभी भी नहीं मिलता। अष्टम मंगल उसे शारीरिक कष्ट देता है जिसकी कुंडली में वह होता है, जीवनसाथी को नहीं। जीवन साथी को सबसे ज्यादा कष्ट तब होता है जबकि जातक की कुंडली में मंगल बारहवां होता है। यह मंगल की सबसे दुखदायी स्थिति होती है। दो विवाह का जो मांगलिक वालों के लिए फैला हुआ विचार है वह सबसे ज्यादा द्वादश भाव में स्थित मंगल के लिए है। आपकी जानकारी के लिए एक विशेष बात ये भी है कि मांगलिक होना हमेशा नुकसानदेह ही नही होता, इसके कुछ फायदे भी है। मांगलिक व्यक्ति जिस भाव से भी बना हो, उसके लग्नेश का कोई संबंध यदि एकादश भाव से हो तो जातक की आर्थिक स्थिति विवाह के बाद सुधरती है। यह मकर लग्न वालों के लिए विशेष रूप से लागु होती है। मांगलिक व्यक्तियों के विवाह में अनेक प्रकार की अङचनें आती हैं, 25 साल से पहले विवाह की संभावना बहुत कम होती है। मंगल प्रभावी व्यक्ति को विवाह 28 साल बाद करना चाहिए क्योंकि इस उम्र के बाद कुंडली से मंगल लगभग निष्प्रभावी हो जाता है। दूसरे, जातक जिस भाव की वजह से मांगलिक बन रहा हो यदि वहां शुक्र भी साथ में हो तो जातक को अत्यधिक कामुक बना देता है, इस विषय में, यदि दूसरे शुभ ग्रहों का सहयोग न हो तो मानसिकता विकृत हो जाती है। मांगलिक व्यक्ति के विषय में जो कहा जाता है कि फलां जगह पर यदि फलां ग्रह हो तो मंगल दोष का निवारण हो जाता है इस विषय में मैं व्यक्तिगत रूप से सहमत नहीं हूं, बहुत सी कुंडलियों की विवेचना के बाद मैंने पाया कि ऐसा होने पर मंगल का प्रभाव पूरी तरह से कुंडली से समाप्त नहीं होता।